एक सुंदर से गाँव में कन्नन नाम का एक लड़का और उसके पिता सोमू रहते थे। सोमू एक बहुत ही ईमानदार व्यक्ति थे और उन्हें शराब पीने की आदत नहीं थी। एक शाम, जब कन्नन अपने पिता के साथ बाज़ार जा रहा था, उसने देखा कि एक व्यक्ति शराब के नशे में लड़खड़ा रहा है और लोगों पर चिल्ला रहा है। वह व्यक्ति बहुत खुश दिख रहा था, जैसे उसे किसी बात का होश ही न हो।
कन्नन को बहुत हैरानी हुई। उसने अपने पिता से पूछा, "पिताजी, वह आदमी ऐसा क्यों कर रहा है? क्या उसे नहीं पता कि शराब पीना कितनी बुरी बात है?"
सोमू ने प्यार से कन्नन को समझाया, "बेटा, जब कोई व्यक्ति नशे में होता है, तो वह एक झूठी खुशी की दुनिया में खो जाता है। उस समय वह यह पूरी तरह भूल जाता है कि शराब उसके जीवन में कितनी मुश्किलें, दुख और शर्मिंदगी लेकर आती है। हम जो होश में हैं, हमें उसकी गलती साफ दिख रही है, लेकिन नशे में धुत व्यक्ति अपनी गलती को पहचानने की शक्ति भी खो देता है।"
कन्नन ने उस दिन एक बहुत बड़ी बात सीखी। उसने समझा कि जीवन में सही और गलत के बीच फर्क करने के लिए एक साफ और जागरूक मन का होना कितना ज़रूरी है।