एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन को मीठा और तला हुआ खाना बहुत पसंद था, और वह अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा खा लेता था। एक बार गाँव के मेले के दौरान, अर्जुन ने सुबह से रात तक केवल मिठाइयाँ और पकवान ही खाए। उसने सोचा, 'थोड़ा और खा लेने में क्या बुराई है!'
अगले दिन सुबह, अर्जुन के पेट में बहुत तेज़ दर्द होने लगा। उसे उठने में भी बहुत कठिनाई हो रही थी। उसकी माँ, मीरा, ने उसे हल्का और पौष्टिक भोजन दिया। उसके पिता, रवि, ने उसे समझाते हुए कहा, 'अर्जुन, हमारे शरीर के लिए संतुलन बहुत ज़रूरी है। चाहे वह खाना हो या काम, अगर हम बहुत ज़्यादा करते हैं या बहुत कम, तो बीमार पड़ सकते हैं।'
कुछ दिनों तक सही खान-पान और आराम करने के बाद अर्जुन ठीक हो गया। उसने समझ लिया कि किसी भी चीज़ की अति बुरी होती है। उस दिन के बाद से, अर्जुन ने हर काम और हर भोजन को सही मात्रा में करना सीख लिया।