नीलागिरी नाम के एक सुंदर गाँव में कारी नाम का एक लड़का रहता था। कारी को खाने का बहुत शौक था। उसकी माँ, नीला, हमेशा उसके लिए पौष्टिक सब्जियाँ और दालें बनाती थी ताकि वह स्वस्थ रहे। लेकिन कारी को हमेशा मीठा और तला-भुना खाने की आदत थी। एक दिन गाँव में एक बड़ा मेला लगा। वहाँ तरह-तरह के पकवानों की खुशबू आ रही थी। कारी ने खुद पर काबू नहीं रखा और ढेर सारे लड्डू और तले हुए पकवान खा लिए। उसके दोस्त मरण ने पूछा, 'कारी, क्या तुम्हारा पेट भर गया?' कारी हँसते हुए बोला, 'अभी तो और खाना है!'
अगली सुबह कारी के पेट में बहुत तेज़ दर्द होने लगा। वह उठ भी नहीं पा रहा था। गाँव के डॉक्टर विवेक ने उसे देखकर कहा, 'कारी, तुमने खाने की मात्रा का ध्यान नहीं रखा। बिना नियम के ज़रूरत से ज़्यादा खाना सेहत के लिए बहुत बुरा है।' कारी को अपनी गलती का एहसास हुआ। कुछ दिनों तक हल्का और सही खाना खाने और आराम करने के बाद वह ठीक हो गया। उस दिन के बाद से, कारी ने हमेशा भूख और मात्रा का ध्यान रखना सीख लिया।