एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता एक गरीब किसान थे। आर्यन के दोस्त महँगे खिलौनों और सुंदर कपड़ों के साथ खेलते थे, जबकि आर्यन के पास बहुत साधारण चीज़ें थीं। स्कूल में एक लड़का उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहता, 'तुम बहुत गरीब हो, तुम्हारे पास कुछ भी अच्छा नहीं है।' आर्यन को बुरा लगा, लेकिन उसने कभी गुस्सा नहीं किया। इसके बजाय, वह हमेशा दूसरों की मदद करने और पढ़ाई में मेहनत करने पर ध्यान देता था।
आर्यन बहुत दयालु था। एक बार जब उसके एक सहपाठी की पेंसिल खो गई थी, तो आर्यन ने अपनी पेंसिल उसे दे दी। कुछ समय बाद, गाँव में एक बहुत बड़े व्यापारी आए। उन्होंने बच्चों के लिए एक प्रतियोगिता रखी, लेकिन यह प्रतियोगिता धन के बारे में नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार और बुद्धिमानी के बारे में थी। व्यापारी ने देखा कि आर्यन कितना ईमानदार और मददगार है। आर्यन ने प्रतियोगिता जीत ली और व्यापारी ने उसकी पढ़ाई का सारा खर्च उठाने का फैसला किया। आर्यन समझ गया कि गरीबी कोई शर्म की बात नहीं है, यदि आपके पास अच्छे गुण और नेक दिल है।