एक सुंदर से गाँव में आर्यन और रोहन नाम के दो लड़के रहते थे। वे दिखने में बिल्कुल एक जैसे थे—कद, रंग और यहाँ तक कि उनके कपड़े भी एक जैसे थे। इस वजह से गाँव वाले अक्सर उन्हें जुड़वाँ भाई समझ लेते थे। लेकिन उनके स्वभाव में ज़मीन-आसमान का अंतर था। आर्यन बहुत दयालु था और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था, जबकि रोहन स्वार्थी था और दूसरों का मज़ाक उड़ाने में खुश रहता था।
एक दिन गाँव में एक बड़ा मेला लगा था। भीड़ के बीच एक बूढ़ी दादी माँ चलने में संघर्ष कर रही थीं। आर्यन ने तुरंत दौड़कर उनकी मदद की, उन्हें सहारा दिया और उनका सामान भी उठाया। गाँव वालों ने आर्यन की इस अच्छाई को देखकर मुस्कुराते हुए उसे आशीर्वाद दिया। दूसरी ओर, रोहन ने उस दादी माँ की ओर ध्यान दिए बिना उन्हें धक्का देकर आगे बढ़ने की कोशिश की।
शाम को जब सब मिलकर दावत खा रहे थे, आर्यन ने अपनी मिठाइयाँ सबके साथ बाँटकर खाईं, जिससे सब खुश हो गए। लेकिन रोहन अकेला बैठा अपना खाना खा रहा था और किसी से बात नहीं कर रहा था। तब आर्यन के दादाजी ने कहा, 'लोग उन्हें देखकर सोचते हैं कि वे एक जैसे हैं, लेकिन असली समानता चेहरे में नहीं, बल्कि आत्मा और गुणों में होती है। आर्यन के अच्छे गुण उसे सबका प्रिय बनाते हैं, जबकि रोहन का व्यवहार उसे अकेला कर देता है।' रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने समझा कि रूप से ज़्यादा इंसान का व्यवहार मायने रखता है।