चंद्रवती नामक एक प्राचीन राज्य में आर्यन नाम का एक राजकुमार रहता था। वह बहुत बहादुर था, लेकिन उसमें एक कमी थी: वह केवल तभी सही काम करता था जब दूसरे उसे देख रहे होते थे। एक बार जंगल में शिकार करते समय, आर्यन से अनजाने में एक छोटे हिरण को चोट लग गई। उसे बुरा लगा, लेकिन उसने सोचा, "किसी ने देखा नहीं, तो कोई बात नहीं," और उसने इसे छिपा लिया।
जैसे-जैसे आर्यन बड़ा हुआ, उसे राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। एक बार एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय, उसने सोचा कि अगर वह थोड़ा गलत रास्ता अपनाए, तो उसे जल्दी जीत मिल जाएगी और लोग उसकी प्रशंसा करेंगे। उसके मंत्रियों ने उसे समझाया, लेकिन आर्यन को दुनिया की वाहवाही चाहिए थी। तब उसके पिता, राजा विक्रम ने उसे पास बुलाकर कहा, "पुत्र, एक महान व्यक्ति को अपनी रक्षा के लिए बड़ी दीवारों या दुनिया की प्रसिद्धि की आवश्यकता नहीं होती। उसके भीतर की शर्म और नैतिकता ही उसकी सबसे बड़ी ढाल है। यदि तुम दुनिया के सम्मान से ज्यादा अपने चरित्र के गिरने से डरते हो, तो तुम हमेशा सुरक्षित रहोगे।"
आर्यन को समझ आ गया कि असली शक्ति बाहर की प्रशंसा में नहीं, बल्कि अपने भीतर की आवाज़ को सुनने में है। उसने सीखा कि अपनी मर्यादा और शील को बनाए रखना ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है।