एक सुंदर गाँव में कन्नन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसमें एक कमी थी—वह दूसरों से बात करते समय शिष्टाचार का ध्यान नहीं रखता था। एक बार गाँव के उत्सव में, कन्नन के पिता एक बुजुर्ग व्यक्ति से बहुत महत्वपूर्ण बात कर रहे थे। तभी कन्नन दौड़कर आया और ज़ोर से बोला, "पिताजी, आप इतनी बोरिंग बातें क्यों कर रहे हैं? चुप हो जाइए!" यह सुनकर वहाँ मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। कन्नन के पिता को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। कन्नन के इस व्यवहार से उसके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची।
कुछ दिनों बाद, कन्नन के सामने एक और चुनौती आई। उसे रास्ते में एक सोने का सिक्का मिला। एक पल के लिए उसके मन में आया कि वह इसे रख ले, किसी को पता नहीं चलेगा। लेकिन तभी उसे लगा कि अगर उसने ऐसा किया, तो वह एक बेईमान इंसान कहलाएगा। उसे इस बात का अहसास हुआ कि अगर उसमें सही और गलत के बीच फर्क करने वाली शर्म नहीं रही, तो उसका अपना चरित्र ही खत्म हो जाएगा। उसने वह सिक्का वापस कर दिया। उसने समझ लिया कि बदतमीजी से परिवार का नाम खराब होता है, लेकिन शर्म न होने से इंसान का अपना व्यक्तित्व ही नष्ट हो जाता है।