एक सुंदर गाँव में कथिर नाम का एक लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। उसके पिता एक बढ़ई थे। एक बार, पिता की तबीयत खराब होने के कारण वे काम नहीं कर सके। धीरे-धीरे घर की जमापूंजी खत्म होने लगी। एक दिन, कथिर ने बाज़ार में एक सुंदर लकड़ी का खिलौना देखा और उसे पाने की बहुत इच्छा हुई। वह घर गया और अपनी माँ से पूछा, 'माँ, क्या मुझे वह खिलौना मिल सकता है?'
उसकी माँ की आँखों में आँसू आ गए। उन्होंने धीरे से कहा, 'कथिर, हमारे पास अभी खाने के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं हैं, खिलौना खरीदना हमारे लिए मुमकिन नहीं है।' उस पल कथिर को एक गहरी बात समझ आई। उसने महसूस किया कि केवल भूख ही दुख नहीं है, बल्कि अपनी छोटी सी इच्छा को भी पूरा न कर पाना सबसे बड़ा दुख है। उसने जाना कि गरीबी इंसान की खुशियों को कैसे छीन लेती है।