एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी माधव के साथ रहता था। एक दिन, दादाजी ने अर्जुन को शहद का एक छोटा सा मर्तबान दिया। उन्होंने कहा, 'अर्जुन, इस शहद का आनंद तुम तभी ले पाओगे जब तुम इसे चखोगे।' अर्जुन ने उत्सुकता से शहद चखा और खुशी से झूम उठा, 'वाह! यह कितना मीठा है!'
अगले दिन, जब अर्जुन बगीचे में खेल रहा था, उसने दूर से अपनी छोटी बहन मीरा को अपनी ओर आते देखा। मीरा मुस्कुराते हुए अर्जुन के पास आई, उसके हाथ में एक छोटा सा फूल रखा और खुशी से दौड़ पड़ी। मीरा की उस प्यारी मुस्कान और उसके स्नेह को देखते ही अर्जुन का मन खुशी से भर गया। उसे वैसा ही सुख महसूस हुआ जैसा शहद चखने पर हुआ था।
दादाजी यह सब देख रहे थे। वे मुस्कुराए और बोले, 'देखा अर्जुन? शहद की मिठास का अनुभव करने के लिए उसे चखना पड़ता है। लेकिन सच्चा प्रेम मीरा की मुस्कान को देखने मात्र से ही तुम्हारे मन को मिठास और खुशी दे गया। प्रेम का सौंदर्य केवल उसे पाने में नहीं, बल्कि उसे देखने में ही है।'