एक छोटे से गाँव में आर्यन और मीरा रहते थे। वे बचपन के गहरे दोस्त थे। जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उनके व्यवहार में एक अजीब सा बदलाव आया। एक दिन गाँव के मेले में आर्यन ने मीरा से बात करने की कोशिश की। मीरा ने उसे अनदेखा कर दिया और बहुत रूखेपन से कहा, 'मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है।' आर्यन का दिल टूट गया। उसे लगा कि मीरा अब उसे एक अजनबी की तरह देख रही है और वह उससे नफरत करती है।
शाम को आर्यन की बड़ी बहन, ईशा ने उसकी उदासी देखी। जब आर्यन ने मीरा के व्यवहार के बारे में बताया, तो ईशा मुस्कुराई और बोली, 'आर्यन, मीरा तुमसे नफरत नहीं करती। सच तो यह है कि जब हम किसी से बहुत प्यार करते हैं, तो कभी-कभी उसे जाहिर करने में डरते भी हैं। वह अपनी भावनाओं को छिपाने के लिए और दूसरों के सामने शर्मिंदा न होने के लिए ऐसा व्यवहार कर रही है। उसका कठोर होना असल में उसके मन की घबराहट है।'
अगले दिन जब आर्यन ने मीरा को देखा, तो उसने पाया कि मीरा भले ही गुस्से में बात कर रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक चमक और अपनापन था। आर्यन समझ गया कि मीरा के कड़वे शब्द नफरत नहीं, बल्कि अपने प्यार को छुपाने की एक कोशिश थे। उसने मीरा के उस 'अजनबीपन' में भी छिपे प्यार को पहचान लिया।