पहाड़ों की गोद में बसे एक शांत गाँव में कन्नन नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत ही सरल स्वभाव का था, लेकिन उसका मन हमेशा ख्यालों में खोया रहता था। वह मालती नाम की एक लड़की से प्रेम करता था। मालती की आँखें इतनी सुंदर थीं कि जो भी उन्हें देखता, बस देखता ही रह जाता।
एक दिन गाँव के मेले में, कन्नन फूलों की एक दुकान के पास से गुजर रहा था। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले थे। अचानक, उसकी नज़र एक बहुत ही सुंदर लाल गुलाब पर पड़ी। उस फूल की पंखुड़ियाँ बहुत कोमल थीं और उसका रंग बहुत गहरा था। एक पल के लिए कन्नन का दिल धड़क उठा। उसने सोचा, 'वाह! यह फूल तो बिल्कुल मालती की आँखों जैसा लग रहा है!'
वह उस फूल को निहारने लगा, लेकिन तभी उसके मन में एक उलझन पैदा हो गई। उसने देखा कि बहुत से लोग उस फूल की सुंदरता की प्रशंसा कर रहे थे। उसने सोचा, 'अगर हर कोई इस फूल को इतना सुंदर देख रहा है, तो क्या मालती की आँखें भी सबके लिए इतनी ही साधारण सुंदरता की तरह हैं?' अब उसे फूलों की अपनी सुंदरता दिखाई नहीं दे रही थी; उसे तो बस मालती की आँखों की याद सता रही थी। फूल उसे फूल नहीं, बल्कि अपनी प्रियतमा की आँखों का प्रतिबिंब लग रहे थे।