एक शांत गाँव में माया नाम की एक लड़की रहती थी। माया की आँखें बहुत ही सुंदर, गहरी और चमकती हुई थीं। उसी गाँव के एक तालाब में एक बहुत ही सुंदर नीला कमल खिला हुआ था। उस कमल को अपने रंग और अपनी सुंदरता पर बहुत गर्व था। लेकिन एक दिन, जब माया तालाब के किनारे पानी पीने आई, तो कमल की नज़र उसकी आँखों पर पड़ी।
उस पल कमल को एक अद्भुत अहसास हुआ। उसने महसूस किया कि उसके नीले पंखुड़ियाँ चाहे कितनी भी सुंदर क्यों न हों, वे माया की आँखों की गहराई और चमक की बराबरी कभी नहीं कर सकतीं। उस सुंदरता को देखकर कमल ने अपना सिर झुका लिया और तालाब की तलहटी की ओर देखने लगा। उसने मन ही मन सोचा, 'माया की आँखों की सुंदरता के सामने मैं कुछ भी नहीं हूँ।' कमल ने समझ लिया कि असली सुंदरता केवल रंग में नहीं, बल्कि आँखों की चमक और उनमें छिपी भावना में होती है।