एक सुंदर गाँव में माया नाम की एक लड़की रहती थी। वह बहुत ही शालीन और प्रकृति प्रेमी थी। गाँव में एक बड़ा उत्सव होने वाला था और माया चाहती थी कि वह उस उत्सव में सबसे सुंदर दिखे।
वह जंगल से सुगंधित अनिचम के फूल चुनने गई। फूलों को देखते समय उसने महसूस किया कि उनके डंठल थोड़े नुकीले हैं। उसे पता था कि यदि वह इन डंठलों को सावधानी से हटा दे, तो फूल उसकी त्वचा पर बहुत कोमलता से लगेंगे। लेकिन तभी उसे उत्सव के ढोलों की आवाज़ सुनाई दी। उसे लगा कि उत्सव शुरू होने वाला है और उसके पास समय कम है।
'इतने सारे डंठल निकालने में बहुत समय लगेगा, ऐसे ही ठीक रहेंगे,' उसने सोचा। उसने जल्दबाजी में फूलों को अपने बालों में लगा लिया, डंठल वैसे ही रहने दिए।
जब वह उत्सव में पहुँची और नाचने लगी, तो उन नुकीले डंठलों ने उसकी गर्दन और माथे पर चुभना शुरू कर दिया। वह सुंदर दिखने के बजाय दर्द से कराहती हुई और असहज दिख रही थी। लोगों ने उसकी सुंदरता की प्रशंसा करने के बजाय उसकी परेशानी को देखा। माया को समझ आया कि सुंदरता केवल दिखावे में नहीं, बल्कि बारीकियों और धैर्य में होती है। जल्दबाजी में की गई छोटी सी गलती उसकी पूरी सुंदरता को खराब कर गई।