एक सुंदर से गाँव में इलान और माया रहते थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। एक बार, इलान को अपने परिवार के एक ज़रूरी काम से बहुत दूर शहर जाना पड़ा। जाते समय इलान ने माया का हाथ थामकर कहा, 'माया, मैं जल्द ही वापस आ जाऊँगा। तुम हिम्मत रखना।'
दिन हफ्तों में बदल गए और हफ्ते महीनों में। माया हर दिन उसी रास्ते को देखती रहती जहाँ से इलान आता था। अकेलापन उसे सताता था और उसकी आँखों से आँसू नहीं सूखते थे। गाँव के लोग कहते, 'तुम इतनी तकलीफ क्यों सह रही हो? मान लो कि वह नहीं आएगा और अपनी ज़िंदगी जियो।' लेकिन माया ने हार नहीं मानी। उसने उस विरह के दर्द को अपने दिल में बसा लिया और उसकी यादों के सहारे जीना सीखा।
कई महीनों के बाद, एक शाम इलान घर के दरवाज़े पर खड़ा था। माया की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। वे फिर से मिल गए। उन्होंने दिखाया कि बिछड़ने का दर्द चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, सच्चा प्रेम उसे सहने और फिर से जीवन जीने की शक्ति देता है।