एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक मूर्तिकार और उसकी पत्नी मीरा रहते थे। दोनों के बीच बहुत गहरा प्रेम था। एक बार, अर्जुन को काम के सिलसिले में बहुत दूर जाना पड़ा। विदा होते समय मीरा बहुत उदास थी। अर्जुन ने उसका हाथ थामकर कहा, 'मीरा, भले ही मैं तुमसे दूर जा रहा हूँ, लेकिन हमारे प्यार की यादें हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगी। वही यादें तुम्हें खुशी देंगी।'
महीने बीत गए। अर्जुन के बिना मीरा को घर बहुत सूना लगता था। एक शाम, खिड़की के पास बैठी मीरा पुरानी बातों को याद करने लगी—कैसे वे साथ हँसते थे और कैसे अर्जुन उसे प्यार से देखता था। उन यादों ने मीरा के मन को एक अनोखी शांति और खुशी से भर दिया। उसे अहसास हुआ कि क्षणिक सुख तो पल भर के लिए होते हैं, लेकिन सच्चे प्रेम की यादें मन में एक गहरा और स्थायी आनंद भर देती हैं। जब अर्जुन वापस आया, तो उनका मिलन और भी भावुक और सुंदर था।