एक शांत गाँव में मीरा और आर्यन नाम के दो लोग रहते थे। मीरा को संगीत से प्यार था और आर्यन को प्रकृति से। वे एक-दूसरे के बिना अधूरे थे। एक बार आर्यन को काम के सिलसिले में बहुत दूर जाना पड़ा। जाते समय आर्यन ने मीरा का हाथ थामकर कहा, 'मैं जहाँ भी रहूँ, मेरा मन हमेशा तुम्हारे पास ही रहेगा।'
महीने बीत गए। मीरा को घर में बहुत अकेलापन महसूस होता था। जब भी वह कोई धुन गुनगुनाती, उसे आर्यन की मुस्कान याद आती। वह हर पल उसी के ख्यालों में खोई रहती थी। लेकिन उसके मन में एक छोटा सा सवाल हमेशा उठता था: 'मैं तो हर पल उसे याद करती हूँ, पर क्या वह भी मुझे याद करता होगा? क्या नए लोगों और नई जगहों के बीच वह मुझे भूल तो नहीं गया?'
एक शाम, जब सूरज ढल रहा था, आर्यन अचानक घर लौट आया। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। उसने मीरा को गले लगाया और कहा, 'मीरा, मैंने वहाँ बहुत कुछ देखा, बहुत से लोगों से मिला, लेकिन मेरा दिल हर पल तुम्हें ही ढूँढता रहा। तुम मेरे मन में बसी हो, जैसे मैं तुम्हारे मन में हूँ।' मीरा की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्हें समझ आ गया कि सच्चा प्रेम दूरी से कम नहीं होता, बल्कि यादों से और गहरा हो जाता है।