पहाड़ियों के पास बसे एक छोटे से गाँव में मीरा नाम की एक महिला रहती थी। उसका पति, आर्यन, एक चरवाहा था। एक शाम, जब सूरज ढल रहा था, मीरा अपने घर के आँगन में बैठी थी। आसमान का लाल रंग देखकर उसे घबराहट होने लगी, क्योंकि यह संकेत था कि रात होने वाली है।
तभी, दूर पहाड़ियों से एक बाँसुरी की मधुर धुन सुनाई दी। वह एक चरवाहे की बाँसुरी थी। वह संगीत सुनने में बहुत सुरीला था, लेकिन मीरा के लिए वह किसी तेज़ धार वाले हथियार की तरह था। जैसे ही वह संगीत उसके कानों में पड़ा, उसे याद आया कि आर्यन अभी तक घर नहीं लौटा है और अंधेरा बढ़ता जा रहा है।
वह बाँसुरी की धुन उसे सुकून देने के बजाय, उसके अकेलेपन और विरह के दर्द को और गहरा कर रही थी। वह मधुर संगीत, जो किसी और को खुशी देता, मीरा के लिए उसके हृदय को छलनी करने वाला एक शस्त्र बन गया।