एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक चित्रकार रहता था। वह बहुत ही सुंदर चित्र बनाता था। एक बार गाँव में एक बड़ी चित्रकला प्रतियोगिता हुई। आर्यन की बनाई हुई तस्वीर सबसे बेहतरीन थी। प्रतियोगिता के आयोजक ने आर्यन को अकेले में बुलाया और कहा, "आर्यन, अगर तुम इस बार हार मान लो और दूसरे लड़के को जीतने दो, तो मैं वादा करता हूँ कि अगली बार तुम्हें बहुत बड़ा पुरस्कार मिलेगा। बस चुप रहो और समझौता कर लो।"
आर्यन बहुत परेशान हो गया। उसके मन में एक युद्ध चल रहा था। एक तरफ अपनी मेहनत का फल पाने की तीव्र इच्छा थी, और दूसरी तरफ अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने की जिद। वह पूरी रात सो नहीं सका। उसने अपने मन से कहा, "हे मेरे प्रिय मन, मैं क्या करूँ? क्या मैं अपनी इच्छा को त्याग दूँ या अपना सम्मान? मैं इन दोनों में से किसी एक को भी नहीं छोड़ सकता!"
अगले दिन, आर्यन ने सबके सामने सच बोलने का फैसला किया। उसने कहा कि बिना सच्चाई के मिली जीत का कोई मूल्य नहीं है। उस दिन उसे पुरस्कार तो नहीं मिला, लेकिन पूरे गाँव ने उसे सम्मान की नज़रों से देखा। उसे जो मानसिक शांति मिली, वह किसी भी पुरस्कार से बड़ी थी।