एक शांत गाँव में माया नाम की एक महिला रहती थी। उसका पति, अर्जुन, एक दिन मामूली बात पर उससे नाराज होकर घर छोड़कर चला गया। माया बहुत दुखी थी। वह हर दिन दरवाजे पर बैठकर उसका इंतज़ार करती कि शायद वह लौट आए। लेकिन अर्जुन न तो लौटा और न ही उसने माया के प्रति दया दिखाई।
एक दिन माया अपने मन से बात करने लगी, 'हे मेरे मन! तू कितनी नादान है! जो व्यक्ति तेरे प्रेम की कद्र नहीं करता, जो तुझे छोड़कर चला गया, तू उसी के पीछे क्यों भाग रही है?' उसे अहसास हुआ कि वह एक ऐसे इंसान के लिए रो रही है जिसे उसके आँसुओं की कोई परवाह नहीं है। धीरे-धीरे माया ने खुद को संभालना सीखा। उसने दूसरों के पीछे भागना छोड़कर अपने आप पर ध्यान देना शुरू किया और उसे जीवन में असली शांति मिली।