एक शांत गाँव में अर्जुन और मीरा नाम के पति-पत्नी रहते थे। अर्जुन अपने शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। वह अक्सर कहता था, 'मैं बहुत संयमी हूँ, मैं अपनी भावनाओं को कभी चेहरे पर नहीं आने देता।' वह मीरा के प्रति अपने गहरे प्रेम को अपने भीतर ही छिपा कर रखना चाहता था।
एक बार गाँव में एक बड़ा उत्सव था। मीरा बहुत सुंदर सज-धज कर आई थी। उसे देखते ही अर्जुन का दिल ज़ोर से धड़कने लगा। उसने अपना चेहरा गंभीर बनाए रखने की बहुत कोशिश की, जैसे वह हमेशा करता था। उसने सोचा कि वह अपनी भावनाओं को पूरी तरह छुपा लेगा।
लेकिन उसकी आँखें झूठ नहीं बोल सकती थीं। जब भी मीरा मुस्कुराती, अर्जुन की आँखों में एक चमक आ जाती। वह जितना खुद को रोकने की कोशिश करता, उसके चेहरे पर उतनी ही प्यारी मुस्कान आ जाती। गाँव के लोग कहने लगे, 'अर्जुन सोचता है कि उसने अपना प्यार छुपा लिया है, लेकिन उसकी आँखें सब कुछ बता रही हैं!' अर्जुन को समझ आ गया कि सच्चा प्यार एक ऐसी रोशनी है जिसे आप चाहे कितना भी ढँक लें, वह बाहर निकल ही आती है।