एक शांत गाँव में इलंगो और नीला रहते थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। एक दिन, एक छोटी सी बात पर बहस हो गई और नीला ने तय किया कि वह इलंगो से बात नहीं करेगी। उसने खुद से कहा, 'मैं उससे बहुत नाराज़ रहूँगी और दिखावा करूँगी कि मुझे उसकी परवाह नहीं है।'
लेकिन जब भी इलंगो उसके पास आता, उसकी आँखों में प्यार और उसके हाथों में नीला के पसंदीदा फूल होते, तो नीला का गुस्सा धीरे-धीरे पिघलने लगता। उसका गुस्सा बिल्कुल वैसा ही था जैसे आग के पास रखा मक्खन पिघल जाता है। वह जितना गुस्सा होने की कोशिश करती, इलंगो की ममता उसे उतना ही नरम कर देती। अंत में, नीला का दिल जीत गया और वह मुस्कुराते हुए इलंगो के पास चली गई। उसने समझ लिया कि जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ नफ़रत का नाटक करना मुमकिन नहीं है।