पहाड़ियों के पास बसे एक छोटे से गाँव में इलंग और मीना रहते थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। एक बार, इलंग को काम के सिलसिले में दूसरे शहर जाना पड़ा। जाते समय उसने मीना का हाथ थामकर कहा, 'मीना, मैं अगले हफ्ते वापस आ जाऊँगा, तुम चिंता मत करना।'
इलंग के जाने के बाद, मीना खिड़की के पास बैठकर बस रास्ते को देखती रहती। समय जैसे थम सा गया था। घड़ी की सुइयां बहुत धीरे चल रही थीं। उसे ऐसा लग रहा था जैसे एक घंटा एक पूरे दिन के बराबर हो। उसे न तो भूख लग रही थी और न ही नींद आ रही थी। उसका मन बस इलंग के आने की राह देख रहा था।
दूसरों के लिए एक हफ्ता जल्दी बीत सकता है, लेकिन मीना के लिए वह एक दिन सात दिनों की लंबी तपस्या जैसा लग रहा था। जब अंत में इलंग वापस आया, तो मीना की खुशी का ठिकाना न रहा और उसका सारा इंतज़ार सफल हो गया।