एक छोटे से गाँव में आर्यन और मीरा नाम का एक जोड़ा रहता था। मीरा आर्यन से बहुत प्यार करती थी, लेकिन उसका मन हमेशा एक अजीब सी कशमकश में रहता था।
जब आर्यन काम के सिलसिले में शहर जाता, तो मीरा बहुत उदास हो जाती। वह खिड़की पर बैठकर बस उसी का इंतज़ार करती और सोचती, 'वह कब आएगा? उसके बिना मेरा मन नहीं लगता।' उसे उसके बिछड़ने का डर सताता था।
लेकिन जब आर्यन घर पर होता, तब भी मीरा का मन शांत नहीं रहता था। वह उसे देखकर मुस्कुराती, पर तभी उसके मन में एक डर बैठ जाता, 'आर्यन कितना प्यारा है, अगर कभी यह खुशी खत्म हो गई तो? अगर वह मुझे छोड़कर चला गया तो?' उसे साथ होने पर भी उसे खोने का डर रहता था।
एक शाम, आर्यन ने देखा कि मीरा बहुत परेशान बैठी है। उसने पूछा, 'मीरा, क्या बात है? तुम इतनी उदास क्यों हो?'
मीरा ने रुआँसे स्वर में कहा, 'आर्यन, यह बहुत अजीब है। जब तुम पास नहीं होते, तो मुझे तुम्हारे दूर होने का डर लगता है। और जब तुम मेरे पास होते हो, तब भी मुझे डर लगता है कि कहीं तुम मुझे छोड़कर न चले जाओ। मेरा मन कभी चैन से नहीं रहता।'
आर्यन ने मीरा का हाथ थाम लिया और प्यार से कहा, 'मीरा, यह डर ही तो बताता है कि तुम्हारा प्यार कितना गहरा है। हम जिसे सबसे ज्यादा चाहते हैं, उसे खोने का डर हमेशा बना रहता है। लेकिन इस डर की वजह से आज की खुशी को मत खोना।'
मीरा को समझ आ गया कि उसका डर असल में उसके प्रेम की गहराई का ही एक रूप है। उसने डरना छोड़ दिया और उनके साथ बिताए हर पल का आनंद लेने लगी।