एक सुंदर से गाँव में मीरा और समीर रहते थे। वे एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। एक दिन समीर ने एक छोटा सा खेल खेलने की सोची। वह वास्तव में नाराज़ नहीं था, बस यह देखना चाहता था कि मीरा उसे कितना याद करती है। इसलिए, उसने मीरा से बात करना बंद कर दिया और थोड़ा रूखा व्यवहार करने लगा।
मीरा समझ गई कि समीर बस नाटक कर रहा है। उसने तुरंत जाकर उसे मनाने की कोशिश नहीं की। उसने सोचा कि अगर वह अभी मान गई, तो समीर को कभी पता नहीं चलेगा कि उसकी कमी क्या होती है। मीरा ने भी शांति बनाए रखी और अपना काम करने लगी, जैसे उसे कोई फर्क ही न पड़ रहा हो।
जैसे-जैसे समय बीता, समीर को बेचैनी होने लगी। मीरा की चुप्पी उसे चुभने लगी। उसे एहसास हुआ कि मीरा के बिना उसका मन कितना उदास है। उसे अपनी गलती का पछतावा होने लगा और वह मीरा के पास जाने के लिए तड़पने लगा। अंत में, समीर मीरा के पास गया और हाथ जोड़कर माफी मांगी।
मीरा मुस्कुराई और उसने समीर को गले लगा लिया। उस थोड़े से अलगाव ने उनके प्यार को और भी गहरा बना दिया था।