एक शांत गाँव में कार्तिक और मीरा नाम का एक जोड़ा रहता था। मीरा बहुत ही कोमल हृदय की थी, लेकिन उसे छोटी-छोटी बातों पर रूठने की आदत थी। एक दिन, एक मामूली सी बात पर मीरा कार्तिक से नाराज़ हो गई और उसने बात करना बंद कर दिया। कार्तिक ने उसे मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मीरा नहीं मानी। अंत में कार्तिक ने शांति से कहा, 'ठीक है मीरा, अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हें अकेला छोड़ दूँ, तो मैं ऐसा ही करूँगा।' और वह अपने काम में लग गया।
कुछ समय बीत गया। मीरा को पहले तो लगा कि वह अपनी नाराज़गी में सही है, लेकिन धीरे-धीरे उसका मन व्याकुल होने लगा। उसे महसूस हुआ कि कार्तिक की दूरी उसे और भी करीब खींच रही है। उसका गुस्सा अब उसकी इच्छा के सामने छोटा पड़ गया था। वह कार्तिक के बिना रह नहीं पा रही थी। अंत में, मीरा खुद चलकर कार्तिक के पास गई और धीरे से उसका हाथ थाम लिया। कार्तिक मुस्कुराया। मीरा का रूठना अब प्यार में बदल चुका था।