एक सुंदर से गाँव में अर्जुन और मीरा नाम के पति-पत्नी रहते थे। अर्जुन एक मूर्तिकार था। एक शाम, जब अर्जुन अपना काम पूरा करके घर लौटा, तो उसने मीरा को देखते ही कहा, "मीरा, आज सारा दिन मैं बस तुम्हारे ही ख्यालों में खोया रहा!" उसने बड़े प्यार से मीरा को गले लगा लिया।
लेकिन मीरा को थोड़ा अकेलापन महसूस हो रहा था। उसने सोचा कि क्यों न थोड़ा प्यार भरा नाटक किया जाए। वह अर्जुन की बाहों से धीरे से अलग हो गई और बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोली, "आप कह रहे हैं कि आप मुझे याद कर रहे थे? मुझे तो लगता है कि आप मुझे पूरी तरह भूल चुके हैं!"
अर्जुन हैरान रह गया। "ऐसा नहीं है मीरा!" उसने समझाने की कोशिश की। लेकिन मीरा ने अपना चेहरा दूसरी तरफ मोड़ लिया और नाराज़ होने का ढोंग करने लगी। अर्जुन समझ गया कि यह गुस्सा नहीं, बल्कि मीरा का प्यार जताने का एक तरीका है। वह मीरा के पास बैठा, उसका हाथ थामा और कोमलता से बोला, "तुम ही मेरी दुनिया हो, मुझसे नाराज़ मत हो।"
अर्जुन की मिठास भरी बातों ने मीरा का सारा बनावटी गुस्सा पिघला दिया। वह मुस्कुराते हुए अर्जुन के कंधे पर सिर रखकर बैठ गई। उनकी यह छोटी सी नोक-झोंक उनके रिश्ते को और भी गहरा बना गई।