एक छोटे से गाँव में आर्यन और मीरा नाम के पति-पत्नी रहते थे। आर्यन को मीठा खाना बहुत पसंद था। एक दिन मीरा ने बहुत ही स्वादिष्ट खीर बनाई। उसकी खुशबू पूरे घर में महक रही थी। आर्यन ने एक चम्मच खाया और तुरंत बोला, 'मीरा, थोड़ा और चाहिए!' मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा, 'बस इतना ही आर्यन, पेट भर जाना चाहिए।' आर्यन को पहले तो थोड़ा बुरा लगा, लेकिन कुछ देर बाद जब वह खीर उसके पेट में अच्छी तरह पच गई, तो उसे एक अद्भुत शांति और संतोष मिला। उसे समझ आया कि ज़्यादा खाने से कहीं ज़्यादा सुख खाने के बाद उसे पचाने में है।
कुछ दिनों बाद, उनके जीवन में भी ऐसा ही कुछ हुआ। मीरा एक छोटी सी बात पर आर्यन से नाराज हो गई और उसने बात करना बंद कर दिया। आर्यन को पहले तो बहुत बेचैनी हुई, लेकिन उस छोटी सी खामोशी ने उसे मीरा की अहमियत समझा दी। जब मीरा थोड़ी देर बाद मुस्कुराते हुए उसके पास आई, तो उस रूठने और मनाने के बाद जो प्यार मिला, वह हमेशा एक जैसा रहने से कहीं ज़्यादा मीठा था। उन्होंने सीखा कि जैसे भोजन का पाचन उसे पूर्ण बनाता है, वैसे ही प्रेम में छोटी-मोटी तकरार उसे और गहरा और मधुर बनाती है।