एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक बुद्धिमान युवक रहता था। एक शाम, जब सोमू काम से घर लौट रहा था, उसने देखा कि उसके घर के पास झाड़ियों के पीछे चार लोग छिपे हुए हैं। उसे तुरंत समझ आ गया कि वे चोर हैं जो चोरी करने की फिराक में हैं।
घबराने के बजाय, सोमू ने एक तरकीब सोची। वह चुपचाप घर के अंदर गया और अपनी पत्नी से धीरे से कहा, "सुनो, बाहर चोर छिपे हुए हैं। हमें एक नाटक करना होगा। बस वैसा ही करना जैसा मैं कहता हूँ।"
फिर सोमू ज़ोर से चिल्लाकर बोलने लगा, "ओह! आजकल गाँव में चोरी बहुत बढ़ गई है। हमें अपना सारा सोना और गहने इस भारी लोहे के संदूक में भरकर बगीचे के गहरे कुएँ में डाल देना चाहिए। इससे अगर चोर आए भी, तो उन्हें घर में कुछ नहीं मिलेगा!"
बात को सच दिखाने के लिए, सोमू ने पत्थरों से भरा एक भारी संदूक उठाया और उसे कुएँ में 'धप' से डाल दिया। झाड़ियों में छिपे चोर यह देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने आपस में कहा, "हमें घर तोड़ने की ज़रूरत ही नहीं है, बस कुएँ से वह संदूक निकाल लेना ही काफी है!"
रात बीतने के बाद, चोर कुएँ के पास पहुँचे। कुएँ में पानी बहुत ज़्यादा था, इसलिए उनके सरदार ने कहा, "चलो, कुएँ का पानी बाहर खेतों में निकाल देते हैं, ताकि संदूक आसानी से मिल जाए।"
चोर एक-एक करके बाल्टियों से पानी बाहर निकालने लगे। लेकिन वे जितना भी पानी निकालते, कुएँ का जलस्तर कम ही नहीं हो रहा था। दरअसल, कुएँ के नीचे एक छोटा सा छेद था जिससे पानी वापस कुएँ में भर जाता था। थक हारकर चोरों ने कहा, "बहुत मेहनत हो रही है, कल आकर देखते हैं।"
तभी सोमू पेड़ के पीछे से मुस्कुराते हुए बोला, "भाइयों! आप जो पानी बाहर फेंक रहे हैं, वह मेरे खेतों के लिए बहुत अच्छा है। कृपया थोड़ा और पानी डालिए!"
चोर समझ गए कि सोमू ने उन्हें अपनी चतुराई से बेवकूफ बना दिया है। डर के मारे वे वहाँ से भाग खड़े हुए। सोमू ने अपनी समझदारी से अपना घर और धन बचा लिया।
Moral
मुसीबत के समय घबराने के बजाय बुद्धि से काम लेने पर हर समस्या का समाधान मिल जाता है।