एक शांत शाम को, बुद्धिमान सलाहकार सोमनाथ अपने बगीचे में टहल रहे थे। तभी एक व्यापारी बहुत घबराया हुआ उनके पास आया।
"श्रीमान, कृपया मेरी मदद करें!" व्यापारी रोते हुए बोला। "मेरा प्यारा हाथी खो गया है। जंगल के रास्ते से जाते समय वह कहीं गायब हो गया।"
सोमनाथ ने शांति से पूछा, "क्या तुम्हारे हाथी का बायां दांत थोड़ा टूटा हुआ है?"
व्यापारी चौंक गया, "हाँ! वही मेरा हाथी है!"
"और क्या उसकी दाहिनी आंख की रोशनी कम है?" सोमनाथ ने अगला सवाल किया।
"हाँ, हाँ! आपने उसे देखा भी नहीं, फिर आप यह कैसे जानते हैं?" व्यापारी ने हैरानी से पूछा।
"अंत में," सोमनाथ ने कहा, "क्या उसकी पीठ पर एक तरफ शहद के बर्तन और दूसरी तरफ सूखे फल लदे थे?"
व्यापारी की आँखों में आँसू आ गए, "यह तो चमत्कार है! आपने मेरे हाथी को देखा तक नहीं, फिर भी आप सब कुछ सही बता रहे हैं!"
सोमनाथ मुस्कुराए और बोले, "मैंने हाथी को नहीं देखा, लेकिन उसके पदचिन्हों को देखा। उसके पैरों के निशान असमान थे, जिससे पता चला कि वह लंगड़ाकर चल रहा है। साथ ही, मैंने देखा कि उसने रास्ते के केवल एक ही तरफ की झाड़ियों को खाया था। इसका मतलब है कि उसकी दृष्टि एक ही तरफ अच्छी है, इसलिए वह केवल उसी तरफ की वनस्पतियों को खा रहा था।
मैंने रास्ते के एक ओर शहद गिरा हुआ देखा और चींटियों को उसके आसपास घूमते पाया। दूसरी ओर सूखे फल बिखरे हुए थे। इन संकेतों से मैंने अंदाज़ा लगाया कि वह क्या ढो रहा था। यदि तुम हाथी को ढूँढना चाहते हो, तो केवल उसके पैरों के निशान ही मत देखना, बल्कि यह भी देखना कि रास्ते की हरियाली किस तरफ से कम हुई है और ज़मीन पर खाना कहाँ गिरा है। इससे तुम उसे आसानी से पा लोगे।"
व्यापारी ने सोमनाथ का धन्यवाद किया और उनके बताए रास्ते पर चलकर अपने हाथी को सफलतापूर्वक खोज निकाला।
Moral
बारीकियों पर ध्यान देने से कठिन समस्याओं का समाधान मिल जाता है।