पहाड़ों के पास बसे एक सुंदर गाँव में सोमु नाम का एक किसान रहता था। उसके पास मणि नाम का एक गधा था। एक सुबह, सोमु अपनी ताज़ा सब्जियों की टोकरियाँ पास के शहर के बाज़ार में बेचने के लिए तैयार हुआ। पहाड़ी रास्ता संकरा और टेढ़ा-मेढ़ा था, इसलिए सब्जियों की टोकरियाँ नीचे न गिर जाएँ, इसके लिए सोमु ने मणि के गले में एक नरम रस्सी बाँध दी ताकि वह उसे सुरक्षित रास्ता दिखा सके।
लेकिन मणि बहुत ही ज़िद्दी स्वभाव का था। उसे लगा कि रस्सी उसे रोक रही है और यह उसका अपमान है। मणि ने गुस्से में सोचा, 'यह इंसान मुझे एक कैदी की तरह रख रहा है! मैं इतनी मेहनत करता हूँ, फिर भी यह मुझे ऐसे चला रहा है जैसे मुझे रास्ता पता ही न हो। मुझे इस रस्सी की ज़रूरत नहीं है!'
अचानक, मणि ने रस्सी से छुटकारा पाने के लिए तेज़ी से दौड़ना शुरू कर दिया। लेकिन पहाड़ी रास्ता फिसलन भरा था। जैसे ही मणि ने रस्सी को खींचने की कोशिश की, उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ढलान की ओर फिसलने लगा। सोमु चिल्लाया, 'मणि, रुको! यह खतरनाक है!' लेकिन मणि अपनी ज़िद में था।
सोमु ने देखा कि मणि खतरे में है, इसलिए उसने तुरंत रस्सी ढीली कर दी ताकि मणि को चोट न लगे। रस्सी ढीली होते ही मणि लड़खड़ाकर एक छोटी झाड़ी में जा गिरा। मणि को ज़्यादा चोट तो नहीं आई, लेकिन वह बहुत डर गया था। मणि को समझ आ गया कि वह रस्सी उसे परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित रखने के लिए थी। उसने सीखा कि बिना सोचे-समझे ज़िद करना मुसीबत में डाल सकता है।
Moral
हमें मार्गदर्शन को बंधन नहीं समझना चाहिए; कभी-कभी नियम हमारी सुरक्षा के लिए ही होते हैं।