एक घने जंगल के किनारे सोमू नाम का एक गधा रहता था। सोमू बहुत आलसी था और हमेशा इस ताक में रहता था कि बिना मेहनत किए खाना कैसे पाया जाए।
एक दिन जंगल में घूमते समय, सोमू को एक बाघ की खाल मिली। उसके दिमाग में एक शरारत सूझी। 'अगर मैं यह खाल पहन लूँ, तो सब मुझे बाघ समझेंगे! सब डरकर भाग जाएंगे और मैं जो चाहूँ वो ले सकूँगा,' उसने लालच में सोचा।
सोमू ने वह खाल अपने ऊपर ओढ़ ली और पास के एक गाँव की ओर चल दिया। जब गाँव वालों ने एक बाघ को आते देखा, तो वे डर के मारे चिल्लाते हुए अपने घरों में छिप गए। वे डर में अपने सब्जियों और फलों की टोकरियाँ वहीं छोड़ गए।
सोमू ने चुपके से एक टोकरी उठाई और जंगल की ओर भाग गया। 'वाह! अब मुझे मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है। यह भेष तो कमाल का है!' उसने मन ही मन सोचा।
अगले दिन सोमू फिर से गाँव पहुँचा। लेकिन गाँव वाले अब सतर्क थे। एक बुजुर्ग किसान ने गौर किया, 'रुको! एक बाघ कभी अनाज की टोकरी लेकर कैसे चल सकता है? इसमें ज़रूर कुछ गड़बड़ है।'
गाँव वाले चुपके से उस 'बाघ' के पीछे हो लिए। जैसे ही सोमू जंगल के सुरक्षित इलाके में पहुँचा, वह खुशी के मारे ज़ोर-ज़ोर से गाने लगा। उसकी आवाज़ सुनकर गाँव वालों को समझ आ गया कि यह बाघ नहीं, बल्कि भेष बदलकर आया एक गधा है।
गाँव वाले गुस्से में डंडे लेकर बाहर निकले और सोमू को डराकर भगा दिया। सोमू को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तय किया कि वह भविष्य में कभी झूठ का सहारा नहीं लेगा।
Moral
धोखे से मिली सफलता क्षणिक होती है, सच्चाई कभी न कभी सामने आ ही जाती है।