एक शांत गाँव में मणी नाम का एक व्यक्ति अपने दो कुत्तों, मणी और शक्ति के साथ रहता था। मणी बहुत ही शांत और समझदार कुत्ता था, लेकिन शक्ति बहुत ही शरारती और चंचल था।
शक्ति की आदत थी कि जब भी कोई उसके घर के पास से गुजरता, वह उन पर जोर-जोर से भौंकता और उन्हें काटने की कोशिश करता। इससे गाँव वाले डरने लगे और उन्होंने मणी से शिकायत की, "आपका कुत्ता बहुत तंग करता है, कृपया उसे रोकिए!"
शक्ति की शरारतों को रोकने के लिए, मणी ने एक भारी लोहे की जंजीर ली और उसे शक्ति के गले में डालकर एक बड़े पेड़ से बाँध दिया। भारी जंजीर को अपने गले में पाकर शक्ति बहुत गर्व महसूस करने लगा। उसे लगा कि यह जंजीर उसकी शक्ति का प्रतीक है। वह जंजीर की आवाज सुनकर और भी ज्यादा शोर मचाने लगा और इधर-उधर दौड़ने लगा।
तभी शांत स्वभाव वाले मणी ने शक्ति से कहा, "शक्ति, यह शोर बंद करो! तुम्हें लगता है कि यह जंजीर तुम्हें महान बनाती है, लेकिन असल में यह दिखाती है कि तुम पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह शोर तुम्हें सम्मान नहीं, बल्कि अपमान दिलाएगा।"
शक्ति को तब अपनी गलती का एहसास हुआ। उसे समझ आया कि वह जंजीर कोई सजावट नहीं, बल्कि उसकी गलतियों का परिणाम थी। उसने महसूस किया कि उसकी शरारतों ने उसकी आजादी छीन ली है। उस दिन के बाद से शक्ति ने शांत रहना सीख लिया।
Moral
अहंकार और शरारत सम्मान नहीं, बल्कि मुश्किलें लेकर आते हैं।