एक घने जंगल में फेलिक्स नाम की एक लोमड़ी रहती थी। फेलिक्स बहुत चालाक थी, लेकिन उसे अपनी काबिलियत पर बहुत घमंड था।
एक शाम, जब सूरज पहाड़ों के पीछे छिप रहा था, फेलिक्स एक ऊँची चट्टान पर चढ़ गई। डूबते सूरज की रोशनी में, चट्टान पर खड़ी फेलिक्स की छाया ज़मीन पर बहुत बड़ी और डरावनी दिखाई देने लगी।
अपनी विशाल छाया को देखकर फेलिक्स दंग रह गई। उसने सोचा, 'वाह! मैं कितनी बड़ी हूँ! इस छाया को देखकर तो मैं जंगल की सबसे शक्तिशाली जीव लगती हूँ। अब से इस जंगल की रानी मैं ही हूँ!'
तभी वहाँ से एक बूढ़ा शेर गुज़र रहा था। अपनी छाया के भ्रम में डूबी फेलिक्स ने शेर का रास्ता रोक लिया और चिल्लाकर कहा, 'ठहरो शेर! क्या तुमने मेरी यह विशाल छाया देखी? मैं इस जंगल की असली शासक हूँ। तुम यहाँ से चले जाओ!'
शेर ने उसकी मूर्खता पर दया की, लेकिन फेलिक्स नहीं मानी। वह अपनी परछाईं को ही अपनी असली ताकत समझ बैठी थी। अपने अहंकार के कारण उसने अपनी समझ खो दी और एक ऐसी चुनौती दे बैठी जिससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। उसे समझ आया कि असली ताकत परछाईं में नहीं, बल्कि सच्चाई में होती है।
Moral
अहंकार इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है।