एक घने और सुंदर जंगल के किनारे कुत्तों का एक झुंड रहता था। वे दिन भर जंगल की सीमाओं पर खेलते और दौड़ते रहते थे। एक दोपहर, जब वे झाड़ियों के पास खेल रहे थे, उन्हें ज़मीन पर एक बहुत बड़ी चीज़ पड़ी दिखाई दी। वह जंगल के राजा शेर की खाल थी!
कुत्तों को यह नहीं पता था कि वह शेर अब जीवित नहीं है। उन्हें लगा कि वे बहुत शक्तिशाली बन गए हैं। एक कुत्ता उत्साह से चिल्लाया, 'देखो! अब हम इस जंगल के राजा हैं!' सभी कुत्ते मिलकर उस खाल को फाड़ने और उसे खिलौने की तरह इधर-उधर फेंकने लगे। क्योंकि शेर अब कोई खतरा नहीं था, इसलिए खाल को फाड़ना उनके लिए बहुत आसान था।
तभी वहाँ से एक चतुर लोमड़ी गुज़री। कुत्तों को शेर की खाल के साथ खेलते देख, लोमड़ी धीरे से मुस्कुराने लगी।
कुत्तों ने गुस्से में पूछा, 'लोमड़ी बहन, तुम क्यों हंस रही हो? हम यहाँ एक बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं!'
लोमड़ी ने शांति से जवाब दिया, 'दोस्तों, तुम जो कर रहे हो वह बहुत आसान है। अगर वह शेर जीवित होता, तो तुम उसके पास आने की हिम्मत भी नहीं करते। जो पहले से ही हार चुका है या जो अब कोई मुकाबला नहीं कर सकता, उसे नुकसान पहुँचाना बहादुरी नहीं, बल्कि केवल अहंकार है।'
कुत्ते तुरंत चुप हो गए। उन्हें समझ आ गया कि उनकी 'जीत' असल में कितनी छोटी थी और असली ताकत चुनौतियों का सामना करने में है।
Moral
जो मुकाबला नहीं कर सकता, उसे हराना बहादुरी नहीं, बल्कि केवल दिखावा है।