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Panchatantra Tale

गजू और लालची दर्जी

Gaju and the Grumpy Tailor

पहाड़ों के पास बसे एक सुंदर गाँव में गजू नाम का एक छोटा हाथी रहता था। गजू बहुत ही प्यारा और शांत स्वभाव का था। वह रोज़ गाँव आता, गाँव वाले उसे बड़े प्यार से फल और गन्ना खिलाते और फिर वह खुशी-खुशी जंगल…

5–12 yr 3 min medium
दूसरों का बुरा चाहने वालों का अपना ही बुरा होता है।
गजू और लालची दर्जी — NilaTales cover art
5–12 yr 3 min medium
PANCHANTANTRA · kakolukiyam

Frame tale: போரும் அமைதியும் (War and Peace)

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पहाड़ों के पास बसे एक सुंदर गाँव में गजू नाम का एक छोटा हाथी रहता था। गजू बहुत ही प्यारा और शांत स्वभाव का था। वह रोज़ गाँव आता, गाँव वाले उसे बड़े प्यार से फल और गन्ना खिलाते और फिर वह खुशी-खुशी जंगल की ओर चला जाता। गाँव के सभी लोग गजू को बहुत पसंद करते थे।

लेकिन उसी गाँव में रवि नाम का एक दर्जी रहता था, जिसे गजू बिल्कुल पसंद नहीं था। रवि हमेशा मन ही मन चिढ़ता रहता था, 'देखो इस हाथी को! इतना बड़ा शरीर है, पर कोई काम नहीं करता। बस दूसरों के दिए खाने पर पल रहा है!'

एक दिन गाँव में मेला लगा था। गजू भी वहाँ आया। गाँव के बच्चे उसे देखकर बहुत खुश हुए। एक छोटे बच्चे ने गजू की पीठ पर सवारी करने की इच्छा जताई। गजू ने बड़े प्यार से उस बच्चे को अपनी पीठ पर बैठा लिया और उसे सैर कराई। यह देखकर बच्चे के माता-पिता बहुत खुश हुए और उन्होंने गजू को ढेर सारे ताज़े फल उपहार में दिए।

यह सब देखकर रवि को बहुत गुस्सा आया। उसने गजू को सबक सिखाने की एक योजना बनाई। उसने एक बड़ा और पका हुआ केला लिया और उसके अंदर एक नुकीली सुई छिपा दी। जब गजू उसके पास से गुज़रा, तो रवि ने बहुत ही प्यार से नाटक करते हुए वह केला गजू को दे दिया।

जैसे ही गजू ने केला खाया, सुई उसके मुँह में चुभ गई। दर्द के मारे गजू घबरा गया और तुरंत पास के तालाब पर गया ताकि वह अपना मुँह साफ़ कर सके। तालाब का पानी पीते और मुँह धोते समय, गजू ने देखा कि तालाब की नीचे की काली मिट्टी उसके मुँह और सूँड पर लग गई है।

गजू समझ गया कि रवि ने जानबूझकर उसे चोट पहुँचाने की कोशिश की है। उसने रवि को सबक सिखाने का फैसला किया। गजू ने अपनी सूँड में तालाब का कीचड़ वाला पानी भर लिया और चुपके से रवि की दुकान की ओर बढ़ गया।

रवि ने अपनी दुकान में कई नए और कीमती कपड़े सिलने के लिए रखे हुए थे। गजू दुकान के सामने खड़ा हुआ और उसने अपनी सूँड से सारा कीचड़ वाला पानी कपड़ों पर 'फूँ!' करके उड़ा दिया। सारे सुंदर कपड़े कीचड़ से खराब हो गए। जब ग्राहक आए और उन्होंने अपने कपड़े खराब देखे, तो वे रवि पर बहुत चिल्लाए और उससे झगड़ा करने लगे।

रवि को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने देखा कि दूसरों का बुरा करने की कोशिश में उसने अपना ही नुकसान कर लिया। उसे बहुत पछतावा हुआ कि उसने एक बेगुनाह जानवर के साथ बुरा किया।

Moral

दूसरों का बुरा चाहने वालों का अपना ही बुरा होता है।

The Lesson

दूसरों का बुरा चाहने वालों का अपना ही बुरा होता है।

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