एक घने जंगल में एक शेर राजा था और उसका मंत्री एक चतुर लोमड़ी थी। जंगल के सभी जानवर मिल-जुलकर खुशी से रहते थे।
एक दिन, एक नया बंदर जंगल में आया। वह बहुत ही चालाक और धूर्त था। उसने सभी जानवरों को बताया कि उसके पास जादुई शक्तियाँ हैं। उसने हवा में अपने हाथ तेजी से लहराए और अचानक एक मीठा फल प्रकट हो गया! सभी जानवर हैरान रह गए। असल में, बंदर ने उस फल को अपनी बाहों में छिपा रखा था और हाथ हिलाते समय चतुराई से उसे बाहर निकाल दिया था।
"अब से मैं इस जंगल का राजा हूँ!" बंदर ने बड़े गर्व से कहा। एक हिरण ने कहा, "हमें शेर राजा ही पसंद हैं, हमें तुम्हारी ज़रूरत नहीं है।" लेकिन बंदर ने धमकी दी, "अगर तुम मुझे राजा नहीं मानोगे, तो मैं शेर को चुनौती दूँगा और उसे हराकर राजा बनूँगा!"
लोमड़ी ने बंदर की चालाकी पकड़ ली थी। उसने शेर से कहा, "महाराज, यह बंदर धोखेबाज है। हमें इसे एक प्रतियोगिता में हराना चाहिए।"
अगली सुबह, सभी जानवर एक बड़े तालाब के किनारे इकट्ठा हुए। बंदर बड़े घमंड से वहाँ पहुँचा। लोमड़ी ने चुनौती दी, "आज की प्रतियोगिता पानी की सतह पर चलने की है! जो पानी पर चलेगा, वही विजेता होगा!"
यह सुनकर बंदर डर गया। पानी पर कैसे चल सकते हैं? लेकिन लोमड़ी धीरे से पानी में उतरी। देखते ही देखते, लोमड़ी पानी की सतह पर चलने लगी! सभी जानवर खुशी से चिल्लाने लगे, "लोमड़ी ही विजेता है!"
बंदर शर्मिंदा होकर वहाँ से भाग गया। शेर ने लोमड़ी से पूछा, "मित्र, तुमने पानी पर कैसे चला?"
लोमड़ी मुस्कुराई और बोली, "महाराज, मुझे पता चल गया था कि बंदर हाथ में फल छिपाकर धोखा दे रहा है। इसलिए मैंने अपने कछुआ मित्रों से रात में पानी के नीचे एक कतार में खड़े होने को कहा। मैं पानी पर नहीं, बल्कि उनके मजबूत कवच के ऊपर चल रही थी!"
शेर और सभी जानवरों ने लोमड़ी की बुद्धिमानी की बहुत प्रशंसा की।
Moral
धोखाधड़ी से मिली जीत अस्थायी होती है, लेकिन बुद्धि और सच्चाई की हमेशा जीत होती है।