एक हरी-भरी घाटी में भेड़ों का एक झुंड रहता था। उसी झुंड में चिंटू नाम का एक छोटा मेमना था। चिंटू बहुत प्यारा था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह खाने में इतना खो जाता था कि उसे अपने आस-पास का होश ही नहीं रहता था। एक दोपहर, झुंड ताज़ी घास चरने के लिए एक मैदान में गया। चिंटू वहां की मीठी पत्तियों का स्वाद लेने में इतना मग्न हो गया कि उसे समय का पता ही नहीं चला।
जैसे ही सूरज ढलने लगा, झुंड वापस गांव की ओर चल दिया। लेकिन चिंटू वहीं अकेला रह गया। अंधेरा होने लगा और तभी झाड़ियों के पीछे से एक भूखा भेड़िया बाहर निकला। चिंटू बुरी तरह डर गया, लेकिन वह जानता था कि डरने या भागने से काम नहीं चलेगा। उसे कुछ सोचना था।
चिंटू ने हिम्मत जुटाई और भेड़िये से कहा, "भेड़िये दादा, मुझे पता है कि आप मुझे खाने आए हैं। लेकिन क्या मैं मरने से पहले अपनी एक आखिरी इच्छा पूरी कर सकता हूँ? मुझे संगीत पर नाचना बहुत पसंद है। अगर आप ज़ोर से चिल्लाएंगे, तो मैं नाचूँगा और फिर आप मुझे आसानी से पकड़ लेनागा।"
भेड़िये को यह बात अजीब लगी, पर उसने सोचा कि नाचते हुए शिकार करने में मज़ा आएगा। उसने आसमान की ओर मुँह करके ज़ोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। उसकी आवाज़ सुनकर पास ही मौजूद शिकारी कुत्ते उस दिशा में दौड़ पड़े। कुत्तों के भौंकने की आवाज़ सुनकर भेड़िया डर गया और जंगल में भाग गया।
तभी चिंटू की माँ उसे ढूँढते हुए वहाँ पहुँची। चिंटू की चतुराई की कहानी सुनकर उसने उसे गले लगा लिया और बहुत गर्व महसूस किया।
Moral
मुसीबत के समय घबराने के बजाय बुद्धि से काम लेने पर जान बचाई जा सकती है।