एक घने जंगल के किनारे, एक शक्तिशाली शेर और एक चतुर शिकारी के बीच बहस छिड़ गई। बहस इस बात पर थी कि इस दुनिया में सबसे श्रेष्ठ कौन है। शेर ने अपनी दहाड़ और पंजों का प्रदर्शन करते हुए कहा कि वह सबसे बलवान है, जबकि शिकारी ने तर्क दिया कि मानव बुद्धि और उपकरणों के कारण मनुष्य ही सर्वश्रेष्ठ है।
बहस करते हुए वे जंगल से निकलकर एक बड़े शहर के द्वार पर पहुँचे। वहाँ एक विशाल पत्थर की मूर्ति थी। उस मूर्ति में एक मनुष्य को एक बड़े जानवर को काबू में करते हुए दिखाया गया था।
यह देखकर शिकारी गर्व से बोला, "देखो! यह मेरी बात का प्रमाण है! मनुष्य कितना शक्तिशाली है, उसने एक जानवर को अपने वश में कर लिया है!"
शेर ने मूर्ति की ओर देखा और धीरे से मुस्कुराया। शेर ने शांति से कहा, "तुम जो देख रहे हो वह तुम्हारे नजरिए का सच है। लेकिन अगर ध्यान से देखो, तो ऐसा भी लग सकता है कि वह जानवर आज़ाद होने के लिए संघर्ष कर रहा है। हर कोई दुनिया को अपने विश्वास के चश्मे से देखता है।"
शिकारी चुप हो गया। उसे समझ आ गया कि उसने केवल एक ही पक्ष को देखा था।
Moral
हर चीज़ के कई पहलू होते हैं; दूसरों का दृष्टिकोण भी सच हो सकता है।