एक घने जंगल में कपी नाम की एक बिल्ली रहती थी। वह बहुत चालाक थी, लेकिन उसके लिए शिकार करना बहुत मुश्किल था। उस जंगल के पक्षी बहुत समझदार थे। वे हमेशा अपने बड़ों की बातों को मानते थे और बहुत सावधान रहते थे।
एक दिन, कपी ने सुना कि पक्षियों के झुंड का सबसे बुजुर्ग पक्षी बीमार है। कपी ने इसे एक मौके के रूप में देखा। उसने सोचा, 'अगर मैं इन पक्षियों को धोखा देकर उनके घोंसले के पास पहुँच जाऊँ, तो आज दावत हो जाएगी!'
कपी ने एक योजना बनाई। उसने एक पुराना चश्मा और एक छोटा बैग लिया। डॉक्टर जैसा दिखने के लिए उसने अपने शरीर पर एक सफेद कपड़ा लपेट लिया। पक्षियों के पेड़ के पास जाकर कपी ने बहुत ही विनम्र आवाज़ में कहा, "प्यारे पक्षियों! डरो मत। मैं पक्षियों का डॉक्टर हूँ। मैंने सुना है कि आपका मुखिया बीमार है, मैं मदद करने आया हूँ।"
पक्षी उसे शक की निगाह से देख रहे थे। तभी एक छोटे से पक्षी ने कपी को गौर से देखा। बिल्ली बहुत ही दुबली-पतली लग रही थी। उस नन्हे पक्षी ने मुस्कुराते हुए पूछा, "डॉक्टर साहब, आप इतने दुबले क्यों हैं? अगर आप इतने पक्षियों का इलाज करते हैं, तो आपको तो बहुत स्वस्थ होना चाहिए, है ना?"
यह सुनते ही कपी सन्न रह गई। वह डॉक्टर बनने का नाटक तो कर रही थी, लेकिन उसकी भूख ने उसे इतना कमजोर कर दिया था कि उसकी सच्चाई सामने आ गई। अपनी चोरी पकड़े जाने पर कपी वहाँ से दुम दबाकर भाग गई। पक्षियों ने अपनी समझदारी से एक बार फिर खुद को बचा लिया।
Moral
सावधानी और बुद्धिमानी से किसी भी खतरे को टाला जा सकता है।