एक घने जंगल में कबीलन नाम का एक शेर रहता था। वह बहुत शक्तिशाली था, लेकिन बहुत आलसी भी था। कबीलन को शिकार करना बिल्कुल पसंद नहीं था। वह हमेशा अपने दोस्त चणक नाम की लोमड़ी पर निर्भर रहता था। चणक शेर के शिकार के बचे हुए टुकड़ों को खाकर अपना गुजारा करता था।
एक दिन कबीलन को बहुत तेज़ भूख लगी। लेकिन धूप में शिकार के लिए दौड़ने का नाम सुनकर ही उसे आलस आने लगा। "चणक," शेर ने आह भरते हुए कहा, "मुझे भूख लगी है, लेकिन शिकार करने की हिम्मत नहीं हो रही। हम क्या करें?"
चणक के दिमाग में एक तरकीब आई। "महाराज, आप क्यों कष्ट करें? इस जंगल में बहुत से भोले जानवर हैं। मैं एक जानवर को आपकी गुफा के पास ही ले आता हूँ। आप बस इंतज़ार करना और उसे पकड़ लेना।"
चणक थोड़ी दूर गया और उसने एक हिरण के बच्चे को घास चरते देखा। चणक उसके पास गया और बड़े प्यार से बोला, "प्यारे हिरण! क्या तुम्हें पता है कि राजा कबीलन एक नया दोस्त ढूँढ रहे हैं? वे तुम जैसे सुंदर जानवर को अपना मित्र बनाना चाहते हैं। मेरे साथ चलो।"
मासूम हिरण चणक की बातों में आ गया और शेर की गुफा की ओर चल दिया। जैसे ही हिरण गुफा के अंधेरे में पहुँचा, छिपे हुए कबीलन ने झपट्टा मारकर उसे पकड़ लिया।
जब शेर भोजन करने वाला था, तो चणक के मन में लालच आ गया। उसने चालाकी से कहा, "महाराज, मैं बहुत थक गया हूँ। जब तक आप थोड़ा आराम कर लेते हैं, मैं इस भोजन की रखवाली करता हूँ। लेकिन याद रहे, अगर मैं वापस आया और भोजन कम हुआ, तो मैं आपसे शिकायत करूँगा!"
शेर सो गया, लेकिन चणक अपनी भूख नहीं रोक पाया और उसने हिरण का सबसे अच्छा हिस्सा खा लिया। जब शेर जागा, तो उसने देखा कि भोजन का एक बड़ा हिस्सा गायब है।
"चणक!" शेर दहाड़ा, "यह क्या हुआ? खाना कहाँ गया?"
चणक बिल्कुल नहीं डरा। उसने शांति से कहा, "महाराज, आप कितने भोले हैं! अगर इस हिरण के पास दिमाग होता, तो क्या यह एक लोमड़ी के साथ चलकर शेर की गुफा में अपना दोस्त बनाने आता? इसके पास दिमाग नहीं था, इसीलिए यह यहाँ आया!"
शेर चणक की चतुराई देखकर दंग रह गया। उसे समझ आ गया कि ताकत से बड़ी बुद्धि होती है।