एक घने जंगल में एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था। उस पेड़ की ऊंची टहनियों पर 'छाया' नाम का एक चमगादड़ रहता था। छाया बहुत ही लापरवाह था; वह बिना सोचे-समझे कहीं भी उड़ने लगता था।
उसी पेड़ के नीचे झाड़ियों में एक शिकारी का जाल बिछा था। एक शाम, जब छाया तेज़ी से उड़ रहा था, अपनी लापरवाही के कारण वह सीधे उस जाल में जा फंसा। तभी वहां एक भूखी नेवला आ पहुँचा।
'प्लीज, मुझे छोड़ दो!' छाया डर के मारे चिल्लाया। 'मैं बहुत छोटा हूँ, मुझे खाकर तुम्हारा पेट नहीं भरेगा। अगर तुम मुझे जाने दोगे, तो मैं वादा करता हूँ कि मैं बहुत सावधान रहूँगा!'
नेवले ने थोड़ी देर सोचा। 'तुम्हारी बात में दम है,' नेवले ने कहा। 'ठीक है, मैं तुम्हें आज छोड़ देता हूँ, लेकिन दोबारा मेरे सामने मत आना।'
छाया बहुत खुश हुआ और उड़ गया। लेकिन उसने अपनी लापरवाही नहीं छोड़ी। कुछ दिनों बाद, जब वह फिर से उसी पेड़ के पास आया, तो वह फिर से उसी जाल में जा गिरा।
इस बार नेवला वहीं खड़ा था। छाया गिड़गिड़ाने लगा, 'कृपया मुझे माफ कर दो! मैंने अपनी गलती सीख ली है। मुझे बस एक और मौका दे दो!'
लेकिन भूखे नेवले ने कठोरता से कहा, 'अवसर केवल एक बार दरवाजा खटखटाते हैं। पहली बार मैंने दया दिखाई थी, लेकिन अब मुझे भूख लगी है। तुमने अपना पहला मौका बर्बाद कर दिया, अब तुम्हें उसका फल भुगतना होगा।'
नेवले ने छाया को पकड़ लिया। छाया को अपनी गलती का एहसास तब हुआ जब बहुत देर हो चुकी थी।
Moral
जो अवसर हमें मिलते हैं, उनका सही उपयोग करना चाहिए, क्योंकि वे दोबारा नहीं आते।