एक सुंदर फलों के बगीचे में चिप्पु नाम की एक गिलहरी और मिनू नाम की एक छोटी चुहिया रहती थीं। उस बगीचे में अनाज का एक बड़ा गोदाम था, जहाँ बहुत सारा स्वादिष्ट अनाज और सूखे मेवे रखे जाते थे।
एक दिन, मिनू चुहिया ने गोदाम के पास एक लकड़ी का बक्सा देखा। बक्से का ढक्कन तो बंद था, लेकिन एक कोने में एक छोटा सा छेद था। मिनू उस छेद से चुपके से अंदर घुस गई। अंदर बहुत सारा सुनहरा अनाज था। मिनू ने खाना शुरू किया, और अनाज इतना स्वादिष्ट था कि वह खुद को रोक ही नहीं पाई। वह तब तक खाती रही जब तक कि उसका पेट एक छोटे गुब्बारे की तरह फूल नहीं गया।
जब मिनू ने वापस बाहर निकलने की कोशिश की, तो वह घबरा गई! उसका पेट इतना बड़ा हो गया था कि वह उसी छोटे छेद से बाहर नहीं निकल पा रही थी। मिनू डर के मारे वहीं फंस गई।
तभी चिप्पु गिलहरी वहाँ आई। मिनू को परेशान देखकर चिप्पु ने कहा, "ओह मिनू! तुमने यह क्या किया? तुमने लालच में आकर ज़रूरत से ज़्यादा खा लिया, इसीलिए तुम फंस गई हो!"
मिनू रोते हुए बोली, "मुझे बहुत भूख लगी थी, चिप्पु! अब मैं क्या करूँ?"
चिप्पु ने समझदारी से कहा, "अब तुम कुछ नहीं कर सकतीं। तुम्हें बस धैर्य रखना होगा। जब तक तुम्हारा पेट वापस पहले जैसा छोटा नहीं हो जाता, तुम्हें यहीं इंतज़ार करना होगा। तभी तुम बाहर निकल पाओगी।"
अगली सुबह जब मिनू का पेट कम हुआ, तो वह आसानी से छेद से बाहर निकल आई। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने चिप्पु से कहा, "शुक्रिया दोस्त! तुमने मुझे सही रास्ता दिखाया। अब से मैं कभी लालच नहीं करूँगी।"
उस दिन के बाद से, मिनू ने हमेशा सब कुछ सीमित मात्रा में ही खाना सीखा।
Moral
लालच का फल हमेशा बुरा होता है।