एक सुंदर गाँव के पास सोमु नाम का एक किसान रहता था। उसके पास मणि नाम की एक प्यारी बकरी थी। सोमु मणि का बहुत ख्याल रखता था और उसे रोज़ ताज़ा घास और अनाज देता था। लेकिन मणि को हमेशा कुछ नया और स्वादिष्ट खाने की लालसा रहती थी।
एक रात, जब मणि जंगल के किनारे घूम रही थी, एक चालाक लोमड़ी उसके पास आई। लोमड़ी ने फुसफुसाते हुए कहा, "मणि सहेली, तुम रोज़ वही सूखी घास क्यों खाती हो? मेरे साथ चलो, जंगल के उस पार आमों का एक बड़ा बगीचा है। वहाँ बहुत मीठे आम लगे हैं। हम दोनों मिलकर मजे से खाएंगे!"
मणि लोमड़ी की बातों में आ गई और उसके साथ बगीचे में पहुँच गई। वहाँ रसीले आम खाकर मणि बहुत खुश हुई। खुशी के मारे मणि चिल्लाई, "लोमड़ी दोस्त, यह आम तो बहुत मीठे हैं! मेरा मन गाना गाने का कर रहा है!"
लोमड़ी घबरा गई और बोली, "नहीं मणि! चुप हो जाओ, वरना बगीचे का मालिक जाग जाएगा और हमें पकड़ लेगा।" लेकिन मणि ने लोमड़ी की बात अनसुनी कर दी और ज़ोर-ज़ोर से मिमियाने लगी।
आवाज़ सुनकर बगीचे का मालिक डंडा लेकर दौड़ता हुआ आया। चालाक लोमड़ी तो झाड़ियों में छिप गई, लेकिन मणि पकड़ी गई। मालिक ने मणि को डंडे से मारा। मणि को अपनी गलती का अहसास हुआ कि उसने एक गलत दोस्त की बात मानी और अपना आपा खो दिया।
Moral
बुरी संगति और आत्म-नियंत्रण की कमी नुकसानदेह होती है।