एक बहुत बड़े जंगल में कबीर नाम का एक साही (hedgehog) रहता था। कबीर बहुत सीधा था, लेकिन उसे एक बड़ी चिंता थी। सर्दी का मौसम आने वाला था और उसके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित घर नहीं था। वह दिन भर रहने की जगह ढूँढता रहता था, पर उसे कहीं ठिकाना नहीं मिला।
एक दिन कबीर को दो बड़ी चट्टानों के बीच एक गहरी दरार दिखाई दी। वह जगह बहुत अच्छी लग रही थी। लेकिन जब वह पास गया, तो उसने देखा कि वहाँ कुछ बड़े साँप रहते हैं। कबीर डर गया, पर मजबूरी में वह साँपों के पास गया।
उसने धीरे से कहा, "नमस्ते दोस्तों! मैं बेघर हूँ। क्या आप मुझे इस दरार में अपने साथ रहने देंगे? मैं वादा करता हूँ कि मैं आपको परेशान नहीं करूँगा।"
साँपों ने आपस में बात की। उन्हें कबीर के काँटों से डर लगता था, लेकिन कबीर की हालत देखकर उन्होंने उसे जगह देने का फैसला किया। एक बड़े साँप ने कहा, "ठीक है, अगर तुम शांति से रहोगे तो तुम यहाँ रह सकते हो।"
कबीर खुशी-खुशी अंदर चला गया। लेकिन तभी एक समस्या हो गई। जैसे ही कबीर उस तंग जगह में अंदर गया, उसके शरीर के नुकीले काँटे साँपों के कोमल शरीर में चुभने लगे। साँप दर्द से तड़प उठे।
कबीर के साथ रहना साँपों के लिए बहुत कष्टदायक हो गया। कबीर के हिलने-डुलने से साँप बार-बार घायल हो रहे थे। अंत में, साँपों ने फैसला किया कि इस जगह पर रहना अब सुरक्षित नहीं है। वे उस दरार को छोड़कर किसी दूसरी जगह चले गए। कबीर को घर तो मिल गया, लेकिन उसके काँटों की वजह से वह दूसरों के साथ शांति से नहीं रह सका।
Moral
ऐसे लोगों के साथ रहने से बचें जो स्वभाव से आपके लिए या दूसरों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।