एक घने और सुंदर जंगल में चीकू नाम की एक नटखट गिलहरी रहती थी। उसके दो सबसे अच्छे दोस्त थे—बंटी नाम का एक खरगोश और हू़ट नाम का एक बुद्धिमान उल्लू। वे तीनों जंगल में लुका-छिपी का खेल खेलते थे।
एक दोपहर, जब वे बंटी के घर के पास खेल रहे थे, चीकू गलती से बंटी के बिल के अंदर चली गई। वहाँ बंटी का सबसे प्यारा मिट्टी का बर्तन रखा था। चीकू जैसे ही तेज़ी से गुजरी, उसकी पूंछ उस बर्तन से टकरा गई और बर्तन ज़मीन पर गिरकर टूट गया। 'कड़क!' की आवाज़ के साथ बर्तन के टुकड़े-टुकड़े हो गए।
चीकू बुरी तरह डर गई। 'ओह नहीं! बंटी को यह बर्तन बहुत पसंद है!' उसने घबराते हुए सोचा। डर के मारे चीकू ने एक गलत फैसला लिया। उसने टूटे हुए टुकड़ों को इकट्ठा किया और पास के एक पुराने पेड़ के छेद में छिपा दिया। उसे लगा कि अगर बंटी को पता चला तो वह बहुत दुखी होगा।
जब बंटी अपने घर आया और बर्तन गायब देखा, तो वह बहुत उदास हो गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसका प्यारा बर्तन कहाँ चला गया। बंटी को रोते देख चीकू का मन बहुत भारी हो गया। वह मदद के लिए उल्लू के पास गई।
उल्लू ने शांति से कहा, "चीकू, गलती से कुछ टूट जाना एक भूल है। लेकिन उस भूल को छिपाने के लिए झूठ बोलना उससे भी बड़ी भूल है। पहली गलती के लिए माफ़ी मिल सकती है, लेकिन सच छिपाने से दोस्ती टूट जाती है। जाओ और बंटी को सब सच बता दो।"
चीकू हिम्मत जुटाकर बंटी के पास गई और बोली, "बंटी, मुझे माफ़ कर दो! खेलते समय मुझसे गलती से तुम्हारा बर्तन टूट गया था। मुझे लगा तुम दुखी हो जाओगे, इसलिए मैंने उसे पेड़ के छेद में छिपा दिया। मैंने तुमसे सच नहीं बोला, इसके लिए मुझे खेद है।"
बंटी मुस्कुराया और बोला, "चीकू, बर्तन टूटने से मुझे उतना दुख नहीं हुआ, जितना तुम्हारा सच छिपाने से हुआ था। पर तुमने अब सच बता दिया है, इसलिए मैं तुम्हें माफ़ करता हूँ।"
दोनों ने मिलकर उन टुकड़ों को इकट्ठा किया और सुंदर रंगों से बर्तन को फिर से सजाया। अब वह बर्तन पहले से भी ज़्यादा सुंदर लग रहा था। सच बोलने से चीकू का मन हल्का हो गया और उनकी दोस्ती और भी गहरी हो गई।
Moral
गलती करना मानवीय है, लेकिन गलती को छिपाना दोस्ती के लिए हानिकारक है।