एक घने जंगल में एक कौआ और एक कोयल रहते थे। कौआ बहुत ही शांत स्वभाव का था, लेकिन कोयल को अपने रंग-बिरंगे पंखों पर बहुत घमंड था।
एक दोपहर, कौआ एक पुराने बरगद के पेड़ की डाल पर आराम कर रहा था। तभी कोयल वहां आई और कौवे का मज़ाक उड़ाने लगी।
'अरे ओ कौवे! अपने इन काले और बदसूरत पंखों को देखो। कितने फीके लगते हैं! अब मेरे पंखों को देखो, सूरज की रोशनी में कैसे चमकते हैं। मैं कितनी सुंदर हूँ ना?' कोयल ने हंसते हुए कहा।
कौवे ने शांति से जवाब दिया, 'कोयल बहन, तुम्हारी सुंदरता देखने में अच्छी है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन मेरे काले पंख बहुत मजबूत हैं। ये मुझे तेज़ बारिश और कड़ाके की ठंड से बचाते हैं। तुम्हारे पंख सुंदर तो हैं, पर बहुत नाजुक हैं। जब सर्दी आएगी, तो तुम ठंड से कांपने लगोगी।'
कोयल को बुरा लगा और वह गुस्से में वहां से उड़ गई। लेकिन उसी शाम जंगल में एक बड़ा तूफान आया। तेज़ हवाओं और ठंडी बारिश के कारण कोयल के कोमल पंख भीग गए और वह ठंड से थर-थर कांपने लगी। उसे उड़ने में भी मुश्किल हो रही थी। दूसरी ओर, कौवे के मजबूत पंखों ने उसे सुरक्षित रखा। कोयल को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी सुंदरता पर गर्व करना छोड़ दिया।
Moral
बाहरी सुंदरता से अधिक उपयोगिता और मजबूती मायने रखती है।