एक सुंदर घाटी में रवि नाम का एक किसान अपने भेड़ों के झुंड के साथ रहता था। वे भेड़ें उसके लिए केवल जानवर नहीं, बल्कि उसके परिवार की तरह थीं। एक साल भारी बारिश के कारण जंगलों में घास मिलना मुश्किल हो गया। इसलिए रवि ने अपने खेत में भेड़ों के लिए विशेष रूप से हरी घास उगाई।
एक दिन, भोजन की तलाश में भटकते हुए जंगली भेड़ों का एक समूह रवि के फार्म पर आ पहुँचा। वे बहुत भूखे और थके हुए लग रहे थे। रवि को उन पर दया आ गई और उसने उन्हें अपने खेत की ताजी घास खाने को दी। नए भेड़ों के आने से रवि बहुत उत्साहित था।
लेकिन जल्द ही रवि एक गलती करने लगा। नए जंगली भेड़ों के साथ खेलने और उन्हें खुश करने के चक्कर में, वह उन्हें बहुत अधिक भोजन देने लगा। इस चक्कर में उसने अपनी पुरानी और वफादार भेड़ों के खाने में कटौती कर दी। पुरानी भेड़ें धीरे-धीरे कमजोर और दुबली होने लगीं।
जब बारिश का मौसम खत्म हुआ, तो जंगली भेड़ें वापस जंगल जाने के लिए तैयार हो गईं। रवि ने उन्हें रोकने की कोशिश की और दुखी होकर कहा, "तुम लोग अचानक क्यों जा रहे हो? मैंने तुम्हें इतना खाना और रहने की जगह दी!"
तब एक समझदार जंगली भेड़ ने कहा, "रवि, तुम्हारी दयालुता के लिए धन्यवाद। लेकिन हमने देखा कि नए मेहमानों को खुश करने के लिए तुमने अपने पुराने दोस्तों को भूखा रखा। अगर हम यहाँ रुक गए, तो अगली बार जब नए मेहमान आएंगे, तो तुम हमें भी भूल जाओगे। हम अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए जा रहे हैं।"
रवि को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसे बहुत पछतावा हुआ। उसने समझा कि नए लोगों को प्रभावित करने के चक्कर में पुराने वफादार दोस्तों को नजरअंदाज करना कितना बड़ा नुकसान है।
Moral
नए लोगों को खुश करने के चक्कर में पुराने दोस्तों को कभी नहीं भूलना चाहिए।