एक घने जंगल में नील नाम का एक मोर रहता था। उसके पंख सूरज की रोशनी में रत्नों की तरह चमकते थे। नील दिखने में बहुत सुंदर था, लेकिन जंगल के अन्य पक्षी उससे दूर रहते थे। वे आपस में फुसफुसाते, 'इतना सुंदर मोर ज़रूर बहुत घमंडी होगा।' जब भी नील उनसे दोस्ती करने की कोशिश करता, वे उसे छोड़कर कहीं और उड़ जाते। इस वजह से नील बहुत अकेला महसूस करता था।
एक बार जंगल में कड़ाके की ठंड पड़ने लगी। चारों तरफ बर्फ की चादर बिछ गई थी। उसी समय, एक छोटी गौरैया अपने दो नन्हे बच्चों के साथ एक पेड़ की टहनी पर ठिठुर रही थी। ठंड इतनी तेज़ थी कि गौरैया के लिए अपने बच्चों को गर्म रखना मुश्किल हो रहा था। वह बहुत परेशान और दुखी थी।
तभी वहाँ से नील गुज़रा। गौरैया और उसके बच्चों की हालत देखकर नील का दिल भर आया। वह तुरंत पेड़ के पास गया और अपने विशाल और मुलायम पंखों को फैलाकर गौरैया और उसके बच्चों के चारों ओर एक घेरा बना लिया। नील के घने पंख एक गर्म कंबल की तरह काम करने लगे और बच्चों को ठंड से बचा लिया। नील काफी देर तक बिना हिले-डुले वहीं खड़ा रहा ताकि वे सुरक्षित रहें।
यह सब देखकर अन्य पक्षियों को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने सोचा, 'हमने नील की सुंदरता देखकर उसे घमंडी समझ लिया, लेकिन उसका दिल तो कितना बड़ा और दयालु है!' सभी पक्षी नील के पास आए और उससे माफी मांगी। उस दिन के बाद से, जंगल के सभी पक्षी नील के अच्छे दोस्त बन गए और सब मिल-जुलकर रहने लगे।
Moral
किसी के बाहरी रूप को देखकर उसके स्वभाव का अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए।