एक बहुत ही सुंदर और घने जंगल में सभी जानवर मिल-जुलकर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा शेर ने एक प्रतियोगिता की घोषणा की। 'जंगल के सभी बच्चों के लिए एक सुंदरता प्रतियोगिता होगी! सभी माता-पिता अपने बच्चों को सबसे अच्छे कपड़ों और गहनों से सजाकर लाएँ। जो बच्चा सबसे सुंदर और प्यारा होगा, उसे जंगल का शाही पुरस्कार मिलेगा!'
प्रतियोगिता के दिन जंगल में बहुत चहल-पहल थी। मोर अपने पंखों से सजे थे और खरगोश फूलों के हार पहने हुए थे। सभी बच्चे बहुत सुंदर लग रहे थे। सभी जानवर तालियाँ बजाकर उनका स्वागत कर रहे थे।
तभी एक माँ बंदरिया अपने छोटे से बच्चे के साथ मंच पर आई। उस नन्हे बंदर की नाक थोड़ी चपटी थी और कान थोड़े टेढ़े थे। उसे देखते ही जंगल के दूसरे जानवर हंसने लगे। 'देखो, यह कितना अजीब दिखता है!' एक लोमड़ी फुसफुसाई। 'यह कितना भद्दा है!' एक हिरण ने मजाक उड़ाया।
माँ बंदरिया को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने अपने बच्चे की आँखों में देखा, जहाँ उसे केवल मासूमियत और प्यार दिखाई दिया। वह अपने बच्चे को गर्व से सीने से लगाए खड़ी रही।
शेर ने पूछा, 'बताओ, इन सभी बच्चों में सबसे सुंदर बच्चा कौन सा है?' माँ बंदरिया ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा, 'मेरा बच्चा ही इस दुनिया का सबसे सुंदर बच्चा है!'
शेर ने दहाड़ते हुए कहा, 'जो लोग इस बच्चे पर हँस रहे हैं, वे ही इस जंगल के सबसे बड़े मूर्ख हैं। एक माँ के लिए उसका बच्चा दुनिया में सबसे अनमोल और सुंदर होता है। जो केवल बाहरी रूप देखते हैं, वे जीवन का असली सार नहीं जानते।'
शेर ने उस नन्हे बंदर को प्रतियोगिता का विजेता घोषित किया और उसे फूलों का एक सुंदर हार पहनाया। बाकी जानवर अपनी गलती पर शर्मिंदा हो गए।
Moral
माँ की आँखों में उसका बच्चा ही सबसे सुंदर होता है।