ब्रह्मांड के विशाल विस्तार में सूर्य, चंद्रमा और हवा नाम के तीन भाई-बहन रहते थे। उनकी माँ एक विशाल तारा थी। एक बार, पूरा तारा परिवार एक भव्य दावत के लिए गया। सभी ने वहाँ बहुत स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया।
दावत के बाद, सब अपनी माँ के पास लौटे। माँ ने प्यार से पूछा, "मेरे प्यारे बच्चों, क्या तुम मेरे लिए दावत से कुछ लाए हो?"
सबसे पहले सूर्य आगे आया और गर्व से बोला, "माँ, खाना इतना स्वादिष्ट था कि मैं उसे खाने में ही मग्न हो गया! मैंने तुम्हारे बारे में सोचा ही नहीं।"
फिर हवा आई और आलस से बोली, "माँ, कुछ भी उठाकर लाना बहुत भारी काम था, इसलिए मैं कुछ नहीं लाई।"
अंत में चंद्रमा धीरे से आगे आई और बोली, "माँ, मैंने आपके लिए कुछ सितारों का शहद लाया हूँ," और उसने एक छोटा सा पात्र माँ को दे दिया।
माँ ने अपने बच्चों को ध्यान से देखा। उन्होंने सूर्य से कहा, "सूर्य, तुम बहुत स्वार्थी थे। अब तुम हमेशा अपनी गर्मी में अकेले जलते रहोगे।"
हवा से कहा, "हवा, तुम आलसी हो। इसलिए तुम हमेशा बिना रुके बहती रहोगी।"
फिर चंद्रमा को देखकर माँ मुस्कुराई और कहा, "चंद्रमा, तुम्हारा हृदय बहुत दयालु है। तुम हमेशा दुनिया को शांति और शीतलता देने वाली चाँदनी बनकर चमकोगी।"
Moral
स्वार्थ से बढ़कर दूसरों के प्रति प्रेम और दया है।